कागज़ात और व्यावहारिक मार्गदर्शन
अस्पताल के मुर्दाघर से शव लेने की प्रक्रिया, दिल्ली
दिल्ली के अस्पताल में मृत्यु से लेकर परिवार को शव सौंपे जाने तक क्या होता है - उसी क्रम में, जिसमें यह असल में होता है।
- सरकारी प्रक्रिया
- कुछ ही मिनटों में पढ़ें
एक चीज़ कम, जो अकेले समझनी पड़े।
संक्षेप में
दिल्ली का अस्पताल शव तब सौंपता है जब वार्ड मृत्यु सारांश बना दे और मुर्दाघर में दर्ज हो जाए - ज़्यादातर उसी दिन, पोस्टमार्टम हो तो ज़्यादा समय। शव लेने वाले के पास फ़ोटो पहचान पत्र चाहिए; आधार हर जगह चलता है। सरकारी मुर्दाघर पहले एक-दो दिन मुफ़्त रखते हैं, निजी अस्पताल रखने का शुल्क लेते हैं।
अस्पताल का मुर्दाघर और रिकॉर्ड विभाग
ज़्यादातर उसी दिन; पोस्टमार्टम हो तो ज़्यादा
सरकारी अस्पताल में पहले 24-48 घंटे मुफ़्त; निजी अस्पताल रखने का शुल्क लेते हैं
यहाँ से शुरू करें
क्या करना है,
क्रम से।
सूची में क्रम से आगे बढ़ें। हर कदम बस यह मानकर चलता है कि उससे ऊपर वाला पूरा हो चुका है।
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वार्ड मृत्यु सारांश बनाता है
इलाज करने वाले डॉक्टर मृत्यु दर्ज करते हैं और वार्ड मृत्यु सारांश (death summary) बनाता है। यह मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं है - यह अस्पताल का अपना कागज़ है, और आगे सब कुछ इसी पर टिका है। इसकी दो कॉपी माँग लें।
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शव मुर्दाघर ले जाया जाता है
कर्मचारी शव को मुर्दाघर ले जाते हैं, आमतौर पर एक-दो घंटे में। बड़े सरकारी अस्पतालों में रात को ज़्यादा समय लग सकता है। इसके लिए परिवार का वहाँ होना ज़रूरी नहीं।
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MCCD बनता है
अस्पताल फ़ॉर्म 4 - मृत्यु के कारण का चिकित्सा प्रमाण पत्र (MCCD) - बनाता है और रजिस्ट्रार को मृत्यु की सूचना देता है। बाद में मृत्यु प्रमाण पत्र इसी से बनता है, इसलिए निकलने से पहले पक्का कर लें कि यह हो गया है।
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रिकॉर्ड काउंटर पर शव के लिए आवेदन
मृत्यु सारांश और अपना फ़ोटो पहचान पत्र रिकॉर्ड या मुर्दाघर काउंटर पर ले जाएँ। सामान्यतः निकटतम परिजन ही शव लेते हैं। एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर होते हैं और शव सौंप दिया जाता है।
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शव लेने से पहले गाड़ी बुला लें
ज़्यादातर अस्पताल छुट्टी के बाद शव को गाड़ी के इंतज़ार में नहीं रखते, और मुर्दाघर निजी कार में शव नहीं देता। पहले शव वाहन या मोर्चरी वैन गेट पर बुला लें।
घर से निकलने से पहले
साथ क्या
ले जाएँ।
ये सब एक बार जुटा लें, फिर इनके लिए वापस नहीं लौटना पड़ेगा।
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अस्पताल का मृत्यु सारांश, या वार्ड की मृत्यु सूचना पर्ची
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शव लेने वाले का फ़ोटो पहचान पत्र - आधार हर जगह चलता है
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मृतक का फ़ोटो पहचान पत्र, अगर हो
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भर्ती या IP नंबर - इससे रिकॉर्ड जल्दी मिलता है
थोड़ी स्पष्टता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कुछ और पूछना हो तो किसी भी समय कॉल करें - हर वक़्त कोई न कोई मौजूद है।
दिल्ली में अस्पताल के मुर्दाघर से शव कौन ले सकता है?
अस्पताल शव कितने समय रख सकता है?
क्या अपनी कार में शव ले जा सकते हैं?
पोस्टमार्टम हो तो?
आगे क्या पढ़ें
संबंधित जानकारी।
इसके आसपास परिवारों को आमतौर पर जिन चरणों की ज़रूरत पड़ती है।
अगर यह सब खुद नहीं करना चाहते
कागज़ी कार्रवाई हम सँभाल लेंगे।
यह हमारी हर व्यवस्था का हिस्सा है - पंजीकरण, प्रमाण पत्र और लाइनों में लगना। आपके मामले में क्या करना होगा, हमसे पूछ लीजिए।