कागज़ात और व्यावहारिक मार्गदर्शन

घर में मृत्यु होने पर क्या करें

पहले कुछ घंटों में क्या करना है, पुलिस कब ज़रूरी है, और कागज़ों का क्रम क्या रहता है।

  • सरकारी प्रक्रिया
  • कुछ ही मिनटों में पढ़ें
काम आने लायक जानकारी
कागज़ी कार्रवाई, क्रम से

एक चीज़ कम, जो अकेले समझनी पड़े।

संक्षेप में

घर में मृत्यु होने पर पहले यह देखें कि वह स्वाभाविक है या नहीं। यदि व्यक्ति बीमार था और डॉक्टर के इलाज में था, तो इलाज कर रहे डॉक्टर प्रमाण पत्र देते हैं और पुलिस की आवश्यकता नहीं होती। अस्वाभाविक या अस्पष्ट मृत्यु में पुलिस के आने तक शरीर को हिलाएँ नहीं।

यहाँ से शुरू करें

क्या करना है,
क्रम से।

सूची में क्रम से आगे बढ़ें। हर कदम बस यह मानकर चलता है कि उससे ऊपर वाला पूरा हो चुका है।

  1. यह देखें कि मृत्यु स्वाभाविक है या नहीं

    यदि व्यक्ति बीमार था और डॉक्टर के इलाज में था, तो यह स्वाभाविक मृत्यु है और इलाज कर रहे डॉक्टर प्रमाण पत्र देते हैं। दुर्घटना, आत्महत्या, ज़हर या अस्पष्ट कारण की स्थिति में पुलिस को सूचित करना आवश्यक है।

  2. अस्वाभाविक मृत्यु में शरीर को न हिलाएँ

    पुलिस के आने तक शरीर को उसी स्थिति में रहने दें। पहले हटा देने से बाद में प्रक्रिया लंबी और कठिन हो जाती है।

  3. डॉक्टर का प्रमाण पत्र लें

    स्वाभाविक मृत्यु में यही आगे की हर प्रक्रिया का आधार बनता है - पंजीकरण से लेकर घाट के काउंटर तक।

  4. शरीर को सुरक्षित रखने की व्यवस्था करें

    यदि परिवार के सदस्य बाहर से आ रहे हैं तो फ्रीजर बॉक्स की व्यवस्था की जाती है।

  5. इक्कीस दिन के भीतर पंजीकरण कराएँ

    मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना बैंक, बीमा, पेंशन और संपत्ति का कोई काम आगे नहीं बढ़ता।

घर से निकलने से पहले

साथ क्या
ले जाएँ।

ये सब एक बार जुटा लें, फिर इनके लिए वापस नहीं लौटना पड़ेगा।

थोड़ी स्पष्टता

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कुछ और पूछना हो तो किसी भी समय कॉल करें - हर वक़्त कोई न कोई मौजूद है।

क्या हर मृत्यु पर पुलिस बुलानी पड़ती है?
नहीं। बुज़ुर्ग या लंबे समय से बीमार व्यक्ति की घर पर मृत्यु स्वाभाविक मानी जाती है और उसमें पुलिस की आवश्यकता नहीं होती। पुलिस केवल अस्वाभाविक या अस्पष्ट मृत्यु में आवश्यक है।
शरीर को कितनी देर घर में रखा जा सकता है?
कुछ घंटों से अधिक की देरी होने पर संरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए। मौसम और परिस्थिति के अनुसार यह समय बदलता है।
रात में मृत्यु हो जाए तो?
फ़ोन किसी भी समय उठाया जाता है। रात में शरीर को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाती है और दाह संस्कार सुबह के लिए तय किया जाता है।

आगे क्या पढ़ें

इसके आसपास परिवारों को आमतौर पर जिन चरणों की ज़रूरत पड़ती है।

अगर यह सब खुद नहीं करना चाहते

कागज़ी कार्रवाई हम सँभाल लेंगे।

यह हमारी हर व्यवस्था का हिस्सा है - पंजीकरण, प्रमाण पत्र और लाइनों में लगना। आपके मामले में क्या करना होगा, हमसे पूछ लीजिए।