कागज़ात और व्यावहारिक मार्गदर्शन
डेड बॉडी एम्बुलेंस, दिल्ली
सबसे पहले हमें पिकअप का पता और गंतव्य चाहिए। बताइए कि आपके प्रियजन घर पर हैं या अस्पताल से छुट्टी का इंतज़ार है।
- सरकारी प्रक्रिया
- कुछ ही मिनटों में पढ़ें
एक चीज़ कम, जो अकेले समझनी पड़े।
संक्षेप में
डेड बॉडी एम्बुलेंस के लिए तीन बातें बताइए - पिकअप का पता, कहाँ ले जाना है, और उस व्यक्ति का नंबर जो चालक से मिलेगा। यात्रा और संरक्षण की ज़रूरत देखकर गाड़ी चुनी जाती है, और बुकिंग पक्की करने से पहले पहुँचने का समय और चालक का नंबर आपको दे दिया जाता है।
यहाँ से शुरू करें
क्या करना है,
क्रम से।
सूची में क्रम से आगे बढ़ें। हर कदम बस यह मानकर चलता है कि उससे ऊपर वाला पूरा हो चुका है।
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पता, गंतव्य और संपर्क बताइए
पिकअप का पता, कहाँ ले जाना है, और उस व्यक्ति का फ़ोन नंबर जो चालक से मिलेगा।
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कहाँ से ले जाना है
घर, अस्पताल या कोई और जगह - यह बताने से पिकअप की व्यवस्था पहले से तय हो जाती है।
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गाड़ी यात्रा के अनुसार
यात्रा कितनी लंबी है और संरक्षण (ठंडा रखने) की ज़रूरत है या नहीं, यह देखकर गाड़ी चुनी जाती है।
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समय और चालक का नंबर पहले
बुकिंग पक्की करने से पहले हम पहुँचने का उपलब्ध समय और चालक का नंबर आपको बता देते हैं।
थोड़ी स्पष्टता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कुछ और पूछना हो तो किसी भी समय कॉल करें - हर वक़्त कोई न कोई मौजूद है।
अस्पताल से ले जाना हो तो क्या करें?
एम्बुलेंस और शव वाहन में क्या अंतर है?
किराया कितना है?
आगे क्या पढ़ें
संबंधित जानकारी।
इसके आसपास परिवारों को आमतौर पर जिन चरणों की ज़रूरत पड़ती है।
अगर यह सब खुद नहीं करना चाहते
कागज़ी कार्रवाई हम सँभाल लेंगे।
यह हमारी हर व्यवस्था का हिस्सा है - पंजीकरण, प्रमाण पत्र और लाइनों में लगना। आपके मामले में क्या करना होगा, हमसे पूछ लीजिए।