कागज़ात और व्यावहारिक मार्गदर्शन
शव वाहन सेवा, दिल्ली एनसीआर
अस्पताल या घर से घाट तक की यात्रा के लिए वाहन - मार्ग, प्रतीक्षा और पहुँचने का समय पहले तय करके।
- सरकारी प्रक्रिया
- कुछ ही मिनटों में पढ़ें
एक चीज़ कम, जो अकेले समझनी पड़े।
संक्षेप में
शव वाहन बुक करने से पहले पिकअप और गंतव्य का पता, मंज़िल, लिफ्ट की उपलब्धता और वाहन कहाँ तक आ सकता है - यह सब पूछा जाता है ताकि मौके पर देरी न हो। शहर के भीतर की छोटी यात्रा और दूसरे शहर तक की लंबी यात्रा में वाहन अलग होता है।
यहाँ से शुरू करें
क्या करना है,
क्रम से।
सूची में क्रम से आगे बढ़ें। हर कदम बस यह मानकर चलता है कि उससे ऊपर वाला पूरा हो चुका है।
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पिकअप और गंतव्य स्पष्ट करें
पता, मंज़िल, लिफ्ट की उपलब्धता और वाहन कहाँ तक आ सकता है - यह सब पहले पूछा जाता है ताकि मौके पर देरी न हो।
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यात्रा के अनुसार वाहन तय करें
शहर के भीतर की छोटी यात्रा और दूसरे शहर तक की लंबी यात्रा में वाहन अलग होता है। लंबी यात्रा में संरक्षण की आवश्यकता भी देखी जाती है।
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प्रतीक्षा और रुकने की योजना बताएँ
यदि रास्ते में घर पर दर्शन के लिए रुकना है, या घाट पर प्रतीक्षा संभावित है, तो यह पहले बता देने से व्यवस्था सही रहती है।
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सजावट वैकल्पिक है
फूलों की सजावट तभी की जाती है जब परिवार कहे। यह अलग से जोड़ी जाने वाली व्यवस्था है, स्वतः शामिल नहीं।
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चालक का संपर्क पहले लें
बुकिंग की पुष्टि के साथ चालक का नाम और नंबर दिया जाता है, ताकि परिवार सीधे बात कर सके।
घर से निकलने से पहले
साथ क्या
ले जाएँ।
ये सब एक बार जुटा लें, फिर इनके लिए वापस नहीं लौटना पड़ेगा।
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मृतक का पहचान प्रमाण
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अस्पताल का मृत्यु सारांश या डॉक्टर का प्रमाण पत्र
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अंतरराज्यीय यात्रा के लिए NOC
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अस्वाभाविक मृत्यु में पुलिस की अनुमति
थोड़ी स्पष्टता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कुछ और पूछना हो तो किसी भी समय कॉल करें - हर वक़्त कोई न कोई मौजूद है।
शव वाहन और एम्बुलेंस में क्या अंतर है?
किराया किस पर निर्भर करता है?
दूसरे राज्य तक ले जाना हो तो?
आगे क्या पढ़ें
संबंधित जानकारी।
इसके आसपास परिवारों को आमतौर पर जिन चरणों की ज़रूरत पड़ती है।
अगर यह सब खुद नहीं करना चाहते
कागज़ी कार्रवाई हम सँभाल लेंगे।
यह हमारी हर व्यवस्था का हिस्सा है - पंजीकरण, प्रमाण पत्र और लाइनों में लगना। आपके मामले में क्या करना होगा, हमसे पूछ लीजिए।