कागज़ात और व्यावहारिक मार्गदर्शन

पोस्टमार्टम कब ज़रूरी है, और रिपोर्ट कैसे मिलती है

किन मामलों में पोस्टमार्टम होता है, पुलिस और अस्पताल क्या करते हैं, संस्कार में कितनी देर होती है, और परिवार को रिपोर्ट कैसे मिलती है।

  • सरकारी प्रक्रिया
  • कुछ ही मिनटों में पढ़ें
काम आने लायक जानकारी
कागज़ी कार्रवाई, क्रम से

एक चीज़ कम, जो अकेले समझनी पड़े।

संक्षेप में

पोस्टमार्टम अस्वाभाविक या अस्पष्ट मृत्यु में होता है - दुर्घटना, आत्महत्या, ज़हर, जलना, हिंसा या कोई भी मृत्यु जिसका कारण साफ़ न हो - पुलिस जाँच के हिस्से के रूप में, BNSS की धारा 194 के तहत (पहले CrPC की धारा 174)। इलाज कर रहे डॉक्टर द्वारा प्रमाणित स्वाभाविक मृत्यु में इसकी ज़रूरत नहीं होती। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस अंतिम संस्कार के लिए NOC देती है, डॉक्टर उपलब्ध हों तो आमतौर पर उसी दिन। रिपोर्ट उस अस्पताल से माँगी जाती है जहाँ पोस्टमार्टम हुआ; कुछ अस्पताल पहले पुलिस NOC माँगते हैं।

यह कौन करता है

पुलिस (जाँच) और सरकारी अस्पताल का फ़ॉरेंसिक विभाग

समय सीमा

पोस्टमार्टम आमतौर पर उसी दिन; रिपोर्ट में ज़्यादा समय लगता है

सरकारी शुल्क

पोस्टमार्टम का कोई शुल्क नहीं; रिपोर्ट की प्रमाणित कॉपी पर मामूली शुल्क हो सकता है

यहाँ से शुरू करें

क्या करना है,
क्रम से।

सूची में क्रम से आगे बढ़ें। हर कदम बस यह मानकर चलता है कि उससे ऊपर वाला पूरा हो चुका है।

  1. पुलिस को सूचना

    किसी भी अस्वाभाविक या अस्पष्ट मृत्यु में 112 डायल करें या पास के थाने को बताएँ। पुलिस के आने तक शरीर को न हिलाएँ।

  2. पुलिस जाँच (इनक्वेस्ट)

    पुलिस अधिकारी शरीर और जगह देखते हैं, मृत्यु का संभावित कारण लिखते हैं और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजते हैं - BNSS की धारा 194 के तहत (पहले CrPC की धारा 174)। कुछ मामले धारा 196 BNSS के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास जाते हैं।

  3. सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम

    यह सरकारी अस्पताल का फ़ॉरेंसिक विभाग करता है, पुलिस सर्जन उपलब्ध हों तो आमतौर पर उसी दिन, वरना अगले दिन तक। कारण साफ़ हो तो पुलिस या मजिस्ट्रेट तय कर सकते हैं कि पोस्टमार्टम की ज़रूरत नहीं।

  4. पहले NOC, फिर संस्कार की बुकिंग

    पोस्टमार्टम के बाद पुलिस अंतिम संस्कार के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देती है। इसके बिना कोई घाट शव स्वीकार नहीं करता। इंतज़ार हो तो तब तक घर पर फ्रीजर बॉक्स से शव सुरक्षित रहता है।

  5. रिपोर्ट के लिए आवेदन

    जिस अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ, वहाँ के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट या फ़ॉरेंसिक विभाग में आवेदन करें। कुछ अस्पताल पहले पुलिस NOC माँगते हैं। अंतिम रिपोर्ट में समय लग सकता है, इसलिए आवेदन की रसीद संभालकर रखें।

घर से निकलने से पहले

साथ क्या
ले जाएँ।

ये सब एक बार जुटा लें, फिर इनके लिए वापस नहीं लौटना पड़ेगा।

थोड़ी स्पष्टता

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कुछ और पूछना हो तो किसी भी समय कॉल करें - हर वक़्त कोई न कोई मौजूद है।

भारत में पोस्टमार्टम कब अनिवार्य है?
अस्वाभाविक या अस्पष्ट मृत्यु में - दुर्घटना, आत्महत्या, ज़हर, जलना, हिंसा, या जब कारण साफ़ न हो। यह पुलिस जाँच के दौरान तय करती है। डॉक्टर द्वारा प्रमाणित स्वाभाविक मृत्यु में इसकी ज़रूरत नहीं होती।
पोस्टमार्टम में कितना समय लगता है?
पुलिस सर्जन उपलब्ध हों तो आमतौर पर उसी दिन, वरना अगले दिन तक। इसके बाद पुलिस NOC के साथ शव मिलता है।
दिल्ली में पोस्टमार्टम रिपोर्ट कैसे मिलती है?
जिस अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ, वहाँ के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट या फ़ॉरेंसिक विभाग में आवेदन करें। कुछ अस्पताल पहले पुलिस NOC माँगते हैं। प्रमाणित कॉपी पर मामूली शुल्क हो सकता है।

आगे क्या पढ़ें

इसके आसपास परिवारों को आमतौर पर जिन चरणों की ज़रूरत पड़ती है।

अगर यह सब खुद नहीं करना चाहते

कागज़ी कार्रवाई हम सँभाल लेंगे।

यह हमारी हर व्यवस्था का हिस्सा है - पंजीकरण, प्रमाण पत्र और लाइनों में लगना। आपके मामले में क्या करना होगा, हमसे पूछ लीजिए।